उसके लिये
किताब में छुपा कर
रखा है लड़की ने एक प्रेम पत्र
जिसे करती है प्रेम वो
पिता ने पढ़ी किताब
रख दी
प्रेम पत्र नहीं पढ़ा
भाई ने पढ़ी किताब
रख दी
प्रेम पत्र नहीं पढ़ा
माँ ने पढ़ी किताब
रख दी
प्रेम पत्र नहीं पढ़ा
दीदी की बिटिया ने
एक दिन पा ली किताब
छोटी सी बिटिया ने
फाड़ डाली समूची किताब
पन्ने-पन्ने उड़ा दिये हवा में
प्रेम पत्र की बना डाली नाव
घर के पीछे बहती नदी में
तैरा दी नाव
प्रेम पत्र का सफर शुरू हो गया है
बिटिया नाव के पीछे-पीछे
दौड़ रही है
लड़की कैलेंडर मे तारीख बदल रही है।
रचना काल 1997

August 1st, 2008 at 5:15 pm
bahut hi achchi kavita hai
August 1st, 2008 at 5:44 pm
लाजवाब ,हमेशा याद रखने रखने एक कविता प्रेम पत्र का सफर शुरू हो गया है
बिटिया नाव के पीछे-पीछे
दौड़ रही है
लड़की कैलेंडर मे तारीख बदल रही है।
August 1st, 2008 at 9:14 pm
sundar kavita ke liye badhayi swikaren
April 26th, 2010 at 4:04 pm
a revealing emotion….