भीड भडक्का
शोर सडक का
बैगन भरता
दाल तडक्का
घंटी शंटी रेलम्पेल
मची है कैसी ठेलमठेल
आओ मिल कर बेंचे तेल
दान धरम
ईमान के धंधे
पापी नीच
बे ईमान
ये गन्दे
खेले मिल कर मौत के खेल
आओ मिल कर बेंचे तेल
अन्नो बन्नो
शबनम शन्नो
राधा रानी
देवी दुखियारी
सबको बना दिया है रेल
आओ मिल कर बेंचे तेल
अरबन शरबन
गरिबा गुरुबन
चले जा रहे
आँखे मीचे
धक्कमपेल लगी है सेल
आओ मिल कर बेंचे तेल

June 30th, 2008 at 11:57 am
बहुत ख़ूब. मज़ा आ गया. माफ़ कीजिएगा, बहुत दिनों बाद आना हुआ इधर. अब फिर नियमित आउंगा.
June 30th, 2008 at 12:00 pm
मज़ा आ गया
June 30th, 2008 at 12:08 pm
मस्त,मजेदार,और भी बहुत कुछ…
आलोक सिंह “साहिल”
June 30th, 2008 at 5:32 pm
बहुत बढ़िया। तो कौन सा तेल बेचना है?
घुघूती बासूती
June 30th, 2008 at 7:19 pm
शुक्रिया.राकेश भाई!
आषीश जी, आलोक जी और घूघुती बासूती जी आप सभी का बहुत बहुत आभार.. बासूती जी देखिये जो बडे है वो लगाते है मक्खन हम जैसे लोग तो तेल से ही काम चलाते हैं. अब तेल कोई भी हो च्वास की गुंजाईश ही कहाँ है अपुन के पास
June 30th, 2008 at 8:45 pm
बहुत खूब जी ..आपका रंग अलग ही है हमेशा जो दिल को भाता है
June 30th, 2008 at 11:21 pm
मजेदार…बेहतरीन!!
July 1st, 2008 at 12:04 pm
रंजना जी और समीर जी बहुत बहुत धन्यवाद!
April 27th, 2009 at 8:34 pm
thank u