मंडी रैप

भीड भडक्का
शोर सडक का
बैगन भरता
दाल तडक्का
घंटी शंटी रेलम्पेल
मची है कैसी ठेलमठेल
आओ मिल कर बेंचे तेल

दान धरम
ईमान के धंधे
पापी नीच
बे ईमान
ये गन्दे
खेले मिल कर मौत के खेल
आओ मिल कर बेंचे तेल

अन्नो बन्नो
शबनम शन्नो
राधा रानी
देवी दुखियारी
सबको बना दिया है रेल
आओ मिल कर बेंचे तेल

अरबन शरबन
गरिबा गुरुबन
चले जा रहे
आँखे मीचे
धक्कमपेल लगी है सेल
आओ मिल कर बेंचे तेल

10 Responses

  1. राकेश Says:

    बहुत ख़ूब. मज़ा आ गया. माफ़ कीजिएगा, बहुत दिनों बाद आना हुआ इधर. अब फिर नियमित आउंगा.

  2. आशीष कुमार 'अंशु' Says:

    मज़ा आ गया

  3. alok singh "sahil" Says:

    मस्त,मजेदार,और भी बहुत कुछ…
    आलोक सिंह “साहिल”

  4. ghughutibasuti Says:

    बहुत बढ़िया। तो कौन सा तेल बेचना है?
    घुघूती बासूती

  5. Avanish Gautam Says:

    शुक्रिया.राकेश भाई!

    आषीश जी, आलोक जी और घूघुती बासूती जी आप सभी का बहुत बहुत आभार.. बासूती जी देखिये जो बडे है वो लगाते है मक्खन हम जैसे लोग तो तेल से ही काम चलाते हैं. अब तेल कोई भी हो च्वास की गुंजाईश ही कहाँ है अपुन के पास :)

  6. ranjanabhatia Says:

    बहुत खूब जी ..आपका रंग अलग ही है हमेशा जो दिल को भाता है

  7. समीर लाल Says:

    मजेदार…बेहतरीन!!

  8. avanish gautam Says:

    रंजना जी और समीर जी बहुत बहुत धन्यवाद!

  9. tjribi Says:

    thank u

Leave a Comment

Please note: Comment moderation is enabled and may delay your comment. There is no need to resubmit your comment.