जब किसी कद्दू या तोरई या लौकी के फूल को
राष्ट्रीय फूल नहीं बनाया गया
तभी यह तय हो गया था कि कमल का फूल ही
राष्ट्रीय फूल होगा
जब कोई गौरइया या मुर्गी या कौआ
नहीं बन सका राष्ट्रीय पक्षी
जब किसी बैल या कुत्ते या हिरन या खरगोश
को नहीं बनाया गया राष्ट्रीय पशु
तभी यह तय हो गया था कि
कौन से होंगे हमारे राष्ट्रीय प्रतीक
जिनसे चीन्हा जाएगा हमें
यह कैसा देश है मेरा
जिससे प्यार करता हूँ मैं
जिसमें मेरे और मेरी जैसी चीजों के
शामिल होने को माना ही नहीं जाता.

January 3rd, 2008 at 8:30 pm
bahut khoob!
January 4th, 2008 at 1:41 am
बहुत बढ़िया और सच !
घुघूती बासूती
June 27th, 2008 at 6:48 pm
it is very true..
i like the feel of this beautiful poem…
October 27th, 2008 at 3:40 pm
kaisa desg hai mera !!!