रात होने से पहले
कहीं खो कर
जो लौट आते हैं
उन्हे क्या पता
रात की कसीदाकारी

देखो मेरे पूरे वज़ूद पर बने हैं
शानदार बेल-बूटे

सुईयां भी चुभी है बे-हिसाब
उनका दर्द है लाज़वाब

नहीं लौटना है मुझे कहीं
रात खत्म होगी तो
सुबह आ ही जाएगी