मंडी रैप
June 30th, 2008

भीड भडक्का
शोर सडक का
बैगन भरता
दाल तडक्का
घंटी शंटी रेलम्पेल
मची है कैसी ठेलमठेल
आओ मिल कर बेंचे तेल

दान धरम
ईमान के धंधे
पापी नीच
बे ईमान
ये गन्दे
खेले मिल कर मौत के खेल
आओ मिल कर बेंचे तेल

अन्नो बन्नो
शबनम शन्नो
राधा रानी
देवी दुखियारी
सबको बना दिया है रेल
आओ मिल कर बेंचे तेल

अरबन शरबन
गरिबा गुरुबन
चले जा रहे
आँखे मीचे
धक्कमपेल लगी है सेल
आओ मिल कर बेंचे तेल

एक सैलानी चहक
नाव में बैठ कर
नदी के उस पार चली गई

मल्लाह की हथेली में
घट्ठे हैं दुख

धोबी पछीटता है
बेरहमी से कपडे
पानी में घुलता है
जाने कितना दुख

पानी में बहते हैं बहाए गए दुख
कल-कल कल-कल

फकीर गाता है मुक्ति का गीत
मुक्ति का गीत गाते है सौदागर भी
जल्लाद और सरकारें भी

मल्लाह लगाता है उगलियों में
गर्म कड्वा तेल
गाता है बिरहा

नदी चुपचाप सुनती है
कल-कल कोलाहल.