About
November 30th, 2007

रोजी रोटी के लिये विज्ञापन बनाता हूँ…

खुराफात का भरोसा नही इसलिये कविताये लिखता हू..

पेंटिग करता हूँ.फोटोग्राफी करता हूँ. ..

बाकी जो मन मे आये करने की कोशिश करता हू…

कई बार कर भी लेता हू.

नये दोहे
November 16th, 2007

बाप धरा मसान मा बाजन लागा फोन
कर्जा लीजै कार का सबते बढिया लोन

आई छीक वज़ीर का टीवी रहा दिखाए
भूत चुडैलें हँसि रहे दाँतन का चमकाए

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दोहे
November 15th, 2007

सागर गागर मे गया पढन प्रेम को पाठ
प्यासे छक कर पी रहे पानी को मिल बाँट

सुविधा अब हर चीज की मिलती आठो याम
जब चाहो तब मरि रहो बारिस सर्दी घाम

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