ज़िन्दगी का हिसाब दीजिये
मौत को अब जवाब दीजिये.
रुख पलटने से क्या फाईदा
दिख गया सब नक़ाब दीजिये.
ज़िन्दगी का हिसाब दीजिये
मौत को अब जवाब दीजिये.
रुख पलटने से क्या फाईदा
दिख गया सब नक़ाब दीजिये.
कभी हो ऐसा
मैं बैठा देखता रहूँ उस दरख्त को
और उस दरख्त से कोई पत्ती न झडे
बल्कि अँखुआ जाए एक कली
मेरे पास वाली टहनी पर
कभी हो ऐसा
माँ झट्क कर झाड दे धूप की चादर
और खन्न से गिरे एक सूरज
माँ बाँध ले उसे आँचल के कोने से
दरवाजा खोलता हूँ तो
घर में घुस आती है सडक
आल्मारियों में बैठ जाता है बाज़ार
घर के हर सदस्य के कमरे के बाहर
जलती है लाल बत्तीटीवी खोलता हूँ
तो कमरे में लग जाती है दुकान
सदी के सबसे बडे नायक और
सबसे नीच विचार पूरी दुनियाँ को
बेचने के लिये लगाते हैं हाँका