इल्म होता तो सिर नही जाता
ज़ख़्म होता तो भर नही जाता
उंगलियाँ ढूँढतीं हैं चेहरे को
कोई होता तो छू नही जाता
कोई ख़ामोश है तो क्योकर है
कोई सुनता तो कह नही जाता
क्यों भरोसा करें उम्मीदों पर
कोई बेबात मर नही जाता
एक ही रात हमको काफ़ी थी
ग़र सवेरा इधर नही आता
