मुझे पानी से बहुत डर लगता है
और ऊँचाई से भी
ठीक इस वक्त जब मैं आपको यह बात बता रहा हूँ
मैं एक बहुत ऊँची और ठहरी हुई पानी की लहर
पर बैठा हूँ सहमा हुआ
मुझे इस बात का बिल्क़ुल भी इल्म नहीं है कि
मैं यहाँ कैसे आ गया या कौन ले आया मुझे
या कौन छोड़ गया मुझे बिल्क़ुल असहाय
जैसे वो दोनो भालू खड़े हैं सड़क के बीचो – बीच
जिनकी पीठ के बाल छिले हुए हैं
सड़क जिसके दोनो ओर हरियाली है बेशुमार
हरियाली जिसे भालुओं ने पहली बार देखा है
और देख कर बदहवास हो गये हैं
अभी तो थमा हुआ है सब कुछ.
लेकिन अभी कोई आवाज़ लगाएगा
कोई डमरू बज़ाएगा
भालू भागेंगे कूदते हुए हरियाली में
जितना भागेंगे भालू
उतनी ही सड़क भागेगी उनके पैरों के नीचे
भालू और तेज़ भागेंगे तो और तेज़ भागेगी सड़क
भालू कभी नहीं पहुच पाएँगे हरियाली तक
आवाज़ सुन कर
मुझे भी मज़बूरन कूदना होगा दूर दूर फैले
बेहद गहरे भयानक काले पानी में
मेरे कूदने के बाद मेरे उपर कूदेगी बहुत देर से
ठहरी हुई बहुत उँची और डरावनी लहर
डूबते हुए मैं तड़पूँगा सांस लेने को
तुम थामोगी मेरा हाथ
कहोगी आ गये तुम
कितने देर से मैं बुला रही थी तुम्हें
अपनी याददाश्त पर ज़ोर डालने पर मुझे
याद आएँगे वो लगातार चलते हुए दिन
जब मिट्टी और पानी में घोला जा रहा था तुम्हे
पता नहीं किस किस के बीजों के साथ
मैं देखूँगा तुम्हारा घर..
तुम्हारे भयानक काले पानी का घर
मैं देखूँगा तुम्हारा साँस लेना
पानी के भीतर मैं सीखूंगा तुम्हारी तरह
साँस लेना बहुत कम हवा में
मैं मागूँगा तुमसे थोड़ी सी सुस्ताने की जगह
ऊपर ज़मीन पर
कूद रहे होंगे भालू और अब तक तो
मदारियों को भी लग चुका होगा पता
जुड़ने भी लगे होंगे तमाशबीन
हम एक दूसरे को देख कर मुसुकुराएँगे
हम मुसुकुराएँगे लेकिन मुस्कुराने से
हमारे डर नहीं जाते रहेंगे
जैसे याद नही करने से
नहीं जाता रहता है इतिहास
हम अपने डर पर काबू पाने के लिए
एक डुबकी और लगाएंगे
इस बार धरती के केंद्र की ओर जाएँगे
और इस बार यह नहीं कहेंगे कि
यही है हमारी आखरी डुबकी
और मेरा विश्वास कीजिए
वहाँ धरती के केंद्र में
कोई धधकती आग नही होगी
वहाँ उल्टा लटका होगा
एक प्राचीन तोता
टांय-टांय बोलता हुआ
सब कुछ सहन करते हुए
सब कुछ वहन करते हुए
सदियों तक मरते हुए
हम जाएगें उस केंद्र तक
और इस बार हम तोते का टेटुआ
दबा कर आएँगे….
Read the rest of this entry »

